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बिजली निगम, नगर निगम और डीटीपी की लापरवाही से डेंजर जोन में बनते चले गए मकान और फैक्ट्रियां

हजारों मकानों और फैक्ट्रियों पर अब बुलडोजर चलाने की तैयारी

Satyakhabarindia

 

 

सत्य खबर हरियाणा

Thousands of houses and factories are in danger zone : हरियाणा के पानीपत शहर के हजारों मकान और फैक्ट्रियां खतरनाक जोन में बनी हुई हैं। अब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड और नगर निगम मिलकर इन मकानों और फैक्ट्री पर बुलडोजर चलाने का काम करेगा।

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नंगल डैम से लेकर दिल्ली की ओर जिले से गुजरने वाली 220 केवी की डबल सर्किट लाइन के नीचे पिछले कई सालों में हजारों मकान और फैक्टरियां बन चुकी हैं। जबकि बिजली विभाग के नियम के अनुसार इस लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध होता है। इस लाइन के दाएं बाएं भी करीब पांच मीटर के दायरे में निर्माण नहीं किया जा सकता। बावजूद लाइन के नीचे, आगे, पीछे सभी जगह निर्माण होते गए। हैरानी की बात ये है कि इन निर्माणों को बिजली निगम ने बिजली के कनेक्शन भी बांट दिए। जबकि बीबीएमबी की ओर से बिजली निगम को 20 से भी ज्यादा बार नोटिस देकर हाईटेंशन तार के नीचे वाले निर्माणों को कनेक्शन न देने बारे सचेत किया जा चुका है। वहीं, जिला योजनाकार विभाग को भी बीबीएमबी नोटिस देकर कार्रवाई करने और अवैध निर्माण रोकने बारे आगाह कर चुका है लेकिन बिजली निगम और डीटीपी की लापरवाही के चलते इन लाइनों के नीचे अवैध निर्माण होते चले गए। अल्टीमेटम के बाद बीबीएमबी खुद इन पर डीटीपी के साथ मिलकर कार्रवाई करेगा। मुख्य रूप से मॉडल टाउन एरिया, शांति नगर, विराट नगर में हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण करने वालों को पहले भी दिए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार शहर में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने अवैध निर्माणों पर अब कार्रवाई की जाएगी। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और नगर निगम पानीपत ने पहली बार ऐसी कॉलोनियों, मकानों, फैक्ट्रियों और सड़कों की रिपोर्ट तैयार की है। इन सभी अवैध ढांचों को गिराने के नोटिस जारी किए जाएंगे। यह कार्रवाई 32 मीटर के प्रतिबंधित गलियारे में आने वाले निर्माणों पर की जाएगी।

बीबीएमबी पावर विंग के इंजीनियरों और नगर निगम पानीपत की एक संयुक्त टीम ने मंगलवार को करीब आधा दर्जन स्थानों का मौका मुआयना किया। टीम ने 32 मीटर के प्रतिबंधित गलियारे में आने वाले हर अवैध ढांचे, प्लॉट और सड़क की पहचान की। इनमें मकान, दुकान और अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।

इन सभी को हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत काम रोकने और अवैध निर्माण ढहाने के नोटिस दिए जाएंगे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति) नियमावली 2010 की धारा 63 के तहत 220 केवी लाइनों के नीचे 32 मीटर का गलियारा पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का ढांचा खड़ा करना पूरी तरह वर्जित है। निजी कॉलोनाइजरों द्वारा इस दायरे में व्यावसायिक निर्माण और अनधिकृत सड़क विकास नगर निगम के नियमों का सीधा उल्लंघन है।

बता दें कि पानीपत से दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनें गुजरती हैं। इनमें 220 केवी डबल सर्किट धूलकोट-पानीपत लाइन शामिल है, जो वर्ष 1964 से संचालित है। यह लाइन नांगल से देश की राजधानी दिल्ली तक बिजली आपूर्ति करती है। दूसरी 220 केवी सिंगल सर्किट कुरुक्षेत्र-पानीपत लाइन है, जो वर्ष 1975 से चल रही है। यह लाइन बीबीएमबी कुरुक्षेत्र को 400 केवी बीबीएमबी पानीपत सबस्टेशन से जोड़ती है।

पूर्व में हाईटेंशन लाइन के नीचे नोटिस देने के साथ लोगों को पर्चे बांट जागरूक भी किया गया है। इन पर्चाें में लोगाें को लाइन के बारे में बताते हुए सख्त हिदायत दी गई कि इनके नीचे निर्माण न किया जाए। अगर कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी लोगाें की ही होगी। लाइन के रेंज एरिया में आने से लोगों को जान माल की हानि हो सकती है। इसलिए इस लाइन से दूरी बनाएं रखें। लाइन के कंडक्टर से मकान की दूरी कम से कम पांच मीटर होनी चाहिए। बच्चों को पतंग उड़ाने से रोकें। पतंग की डोर भी अगर कंडक्टर की रेंज में आई तो बड़ा हादसा हो सकता है। छत के ऊपर कपड़े न सुखाने की सलाह दी गई है। लाइन के नीचे किसी भी प्रकार से आग न जलाने, किसी भी निर्माण या पेड़ लगाने तक पर पाबंदी बताई गई है ताकि लोग जितने इस लाइन से दूर होंगे सुरक्षित रह सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि इस लाइन की वजह से कई बार बड़े हादसे हो चुके हैं। अगर किसी की लापरवाही से कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित की होगी।

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